आष्टा अपोलो अस्पताल फर्जीवाड़ा मामला — NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्यमंत्री, विभागीय अधिकारियों, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग को की शिकायत

आष्टा अपोलो अस्पताल फर्जीवाड़ा मामला — NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्यमंत्री, विभागीय अधिकारियों, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग को की शिकायत

फर्जी स्टाफ दिखाकर अस्पताल को मान्यता दिलाने के भ्रष्टाचार पर उच्च स्तरीय जांच और FIR की मांग — अस्पताल की मान्यता तत्काल निरस्त करने की अपील

आष्टा - शहर में लगातार खुल रहें फर्जी अस्पतालों के कारनामे अब सामने आने लगें हैं एक ऐसे ही मामले में NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आष्टा शहर में स्थित आष्टा अपोलो अस्पताल (NH/5455/SEP-2025) द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और नियमों के खुले उल्लंघन के खिलाफ मुख्यमंत्री, आयुष्मान भारत निरामयम्, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन सीहोर तथा पुलिस विभाग को विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी है।

शिकायत में कहा गया है कि आष्टा अपोलो अस्पताल ने फर्जी स्टाफ दिखाकर, गलत दस्तावेज़ प्रस्तुत कर अस्पताल की मान्यता तथा आयुष्मान योजना का अनुबंध प्राप्त किया है, जबकि वास्तविकता में सूची में दर्ज डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारी — भोपाल और सीहोर के अन्य अस्पतालों में कार्यरत हैं।

*फर्जी स्टाफ की सूची का खुलासा*

NSUI द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि अस्पताल ने जिन व्यक्तियों को अपने स्टाफ के रूप में दिखाया है, वे निम्न संस्थानों में वास्तविक रूप से सेवाएँ दे रहे हैं —

- मल्टीकेयर अस्पताल, भोपाल

- गीतांजलि अस्पताल, आष्टा

- निरवाना अस्पताल, भोपाल

- स्मार्ट सिटी अस्पताल, भोपाल

- संत सिटी अस्पताल, भोपाल

यह प्रकरण सीधे तौर पर फर्जीवाड़े, दस्तावेज़ों में हेराफेरी, मान्यता प्रक्रिया में धोखाधड़ी, BNS नियमों का उल्लंघन, तथा स्वास्थ्य विभाग से अनुचित लाभ लेने जैसा गंभीर आपराधिक कार्य है।

*08/12/2025 को जारी आयुष्मान स्वीकृति पर भी सवाल*

रवि परमार ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत निरामयम् मध्यप्रदेश द्वारा आदेश क्रमांक एसएचएम/एबी/2025/7909 दिनांक 08/12/2025 के तहत अस्पताल को जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, यूरोलॉजी, पॉलीट्रोमा जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए मान्यता दी गई है —जबकि अस्पताल में आवश्यक स्टाफ ही मौजूद नहीं है। यह विभागीय अधिकारियों और अस्पताल संचालक के बीच मिलीभगत को दर्शाता है।

*प्रेषित शिकायत में NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने निम्न मांगें रखी हैं —*

1. उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन - अस्पताल द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज़ों और स्टाफ सूची की निष्पक्ष, विस्तृत व स्वतंत्र जांच की जाए।

2. अस्पताल की मान्यता तत्काल निरस्त की जाए - प्राथमिक जांच में फर्जीवाड़ा सिद्ध होने के चलते आष्टा अपोलो अस्पताल की मान्यता और आयुष्मान अनुबंध को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

3. अस्पताल संचालक पर FIR दर्ज की जाए - फर्जी दस्तावेज़, धोखाधड़ी और नियम उल्लंघन के तहत अस्पताल संचालक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।

4. दो जगह रजिस्टर्ड / कार्यरत डॉक्टर व स्टाफ पर कार्रवाई - ऐसे सभी डॉक्टर, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ जिनका दो जगह रजिस्टेशन पाया जाए — उनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर कानूनी कार्रवाई हो।

5. विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई - जिन अधिकारियों ने बिना सत्यापन के अस्पताल को मान्यता व आयुष्मान स्वीकृति प्रदान की —उनके विरुद्ध भी FIR व निलंबन की कार्रवाई की जाए।

*“स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” — रवि परमार*

NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि

> “जनता की जान के साथ खिलवाड़ करने वाली ऐसी अनियमितताओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फर्जी स्टाफ दिखाकर अस्पताल खोलना और शासन से लाभ लेना गंभीर अपराध है। हमने मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।”

उन्होंने कहा कि NSUI आगे भी जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।

*NSUI की चेतावनी — कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा*

परमार ने स्पष्ट किया है कि यदि इस गंभीर भ्रष्टाचार पर तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती, दोषियों पर FIR दर्ज नहीं होती और अस्पताल की मान्यता रद्द नहीं होती — तो NSUI सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन शुरू करेगी ।

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