कलेक्टर के निर्देश पर अवैध क्लीनिक पर छापामार कार्रवाई, सर्जिकल सामग्री जब्त
कलेक्टर के निर्देश पर अवैध क्लीनिक पर छापामार कार्रवाई, सर्जिकल सामग्री जब्त
बवासीर-मस्से के इलाज की गारंटी का बोर्ड लगाकर चल रहा था दवाखाना, पीड़ित ने जनसुनवाई में की थी शिकायत
आष्टा। नगर के इंदौर नाका-अलीपुर क्षेत्र में कथित रूप से बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के संचालित किए जा रहे एक क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई की। कार्रवाई कलेक्टर बालागुरु के. के. निर्देश के बाद बीएमओ डॉ. अमित माथुर द्वारा गठित टीम ने की। टीम ने मौके से कई सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट सहित अन्य सामग्री जब्त की और दवाखाने का संचालन बंद कराया।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यहां केवल सामान्य इलाज ही नहीं, बल्कि बवासीर और मस्से जैसी बीमारियों के उपचार के नाम पर प्रक्रियाएं किए जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर एक महिला द्वारा दूसरी महिला का इलाज करते हुए भी पाया गया।
मकान के बाहर लगा था ‘गारंटी’ वाला बोर्ड
बताया गया कि संबंधित मकान के बाहर एक बोर्ड लगा हुआ था, जिस पर ‘वेद खान दवाखाना’ लिखा था। बोर्ड पर बवासीर और मस्से का गारंटी के साथ इलाज किए जाने का दावा किया गया था। बोर्ड पर पता और मोबाइल नंबर भी अंकित था तथा सबसे ऊपर ‘शेराज’ लिखा हुआ था।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में इलाज कर रही महिला की चिकित्सकीय योग्यता को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार महिला के पास डॉक्टर के रूप में उपचार करने की आवश्यक शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता नहीं पाई गई।
जनसुनवाई में शिकायत के बाद खुला मामला
पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब भूरा नामक एक मजदूर ने अपने साथ हुए इलाज और कथित आर्थिक नुकसान की शिकायत जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष की। शिकायत में उसने बताया कि वह बवासीर की समस्या से परेशान था और इलाज के लिए इंदौर गया था। वहां किसी व्यक्ति द्वारा उसे आष्टा स्थित उक्त दवाखाने की जानकारी दी गई।
पीड़ित के अनुसार वह इलाज के लिए दवाखाने पहुंचा, जहां इलाज करने वाली महिला ने उससे करीब 25 हजार रुपये में इलाज करने की बात कही। उसे यह भरोसा भी दिया गया कि एक बार इलाज कराने के बाद दोबारा आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भूरा का कहना है कि मजदूरी कर परिवार चलाने के बावजूद उसने किसी तरह पैसे उधार लेकर इलाज के लिए राशि जुटाई और उपचार कराया। लेकिन उसके अनुसार इलाज के बाद आराम मिलने के बजाय उसकी परेशानी और बढ़ गई।
दूसरी बार पहुंचा तो कहा- अभी सूजन ज्यादा है
पीड़ित ने बताया कि परेशानी बढ़ने के बाद वह दोबारा संबंधित महिला के पास पहुंचा। इस पर उसे बताया गया कि अभी अधिक सूजन है, इसलिए इंजेक्शन नहीं लगाया जा सकता। पीड़ित ने आराम के लिए दूसरी दवा देने का आग्रह किया, लेकिन उसके अनुसार उसे राहत नहीं मिली।
इसके बाद वह तीसरी बार संबंधित महिला के पास पहुंचा और बताया कि उसने भोपाल में डॉक्टर को दिखाया है, जहां इलाज पर करीब 60 हजार रुपये खर्च आने की बात कही गई है। पीड़ित के अनुसार उसने यह भी कहा कि जब इलाज की गारंटी दी गई थी और उसे आराम नहीं मिला तो उसके पैसे वापस किए जाएं। आरोप है कि महिला ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद भूरा ने जनसुनवाई में आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत की।
मजदूरी कर परिवार चलाता है पीड़ित
भूरा के अनुसार उसके पास अभी आयुष्मान कार्ड भी नहीं है। वह मजदूरी करके अपनी पत्नी और दो बेटों का पालन-पोषण करता है। उसके दोनों बेटे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, जिनमें एक कक्षा 10वीं और दूसरा कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है।
पीड़ित का कहना है कि सीमित आमदनी के बावजूद उसने बीमारी से छुटकारा पाने की उम्मीद में हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन अब बीमारी बढ़ने के साथ ही आगे के इलाज का खर्च भी उसके सामने बड़ी समस्या बन गया है।
बीएमओ ने गठित की टीम, मौके से सामग्री जब्त
जनसुनवाई में शिकायत पहुंचने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर आष्टा बीएमओ डॉ. अमित माथुर ने स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर संबंधित दवाखाने की जांच कराई। टीम द्वारा की गई कार्रवाई में कई सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट और अन्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मौके पर संचालित दवाखाने को बंद करा दिया गया।
बीएमओ डॉ. अमित माथुर ने बताया कि मामले में एक ऐसी महिला द्वारा लोगों का इलाज किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसकी चिकित्सकीय योग्यता को लेकर गंभीर सवाल हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
क्या पूरे क्षेत्र में होगी ऐसी क्लीनिकों की जांच?
आष्टा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के कई क्लीनिक, दवाखाने और नर्सिंग होम संचालित होने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। ऐसे में यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि क्या नगर और आसपास संचालित सभी निजी क्लीनिकों एवं उपचार केंद्रों की चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन और वहां उपचार करने वाले व्यक्तियों की डिग्री एवं वैधता की जांच की जाएगी?
खासकर उन स्थानों की जांच जरूरी है जहां बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के गंभीर बीमारियों के इलाज अथवा किसी तरह की सर्जिकल प्रक्रिया किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं।
फिलहाल इंदौर नाका-अलीपुर क्षेत्र के इस दवाखाने पर हुई कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की आगे की जांच और कार्रवाई पर नजर रहेगी। वहीं पीड़ित भूरा अब अपने इलाज और कथित तौर पर खर्च हुई राशि को लेकर न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।