सनातन संस्कृति और आधुनिकता के बीच संतुलन जरूरी ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी
सनातन संस्कृति और आधुनिकता के बीच संतुलन जरूरी: ब्रह्माकुमारी कुसुम दीदी
आष्टा। वैश्वीकरण और आधुनिकता के दौर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी सनातन संस्कृति, संस्कार और जीवन-मूल्यों को भी सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। आधुनिकता के बीच हमारी सांस्कृतिक पहचान और संस्कार पीछे नहीं छूटने चाहिए। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, आष्टा शाखा की प्रमुख कुसुम दीदी राजपूत ने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष कैलाश परमार को रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते हुए कही।
कुसुम दीदी ने आष्टा की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि नगर में आज भी सनातन संस्कारों और धार्मिक वातावरण की मजबूत उपस्थिति है।
इस अवसर पर कैलाश परमार ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था ने अनेक लोगों और परिवारों को सकारात्मक एवं संस्कारयुक्त जीवन की दिशा दिखाई है। उन्होंने कुसुम दीदी, नीलिमा दीदी सहित सेवारत बहनों द्वारा आष्टा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे संस्कार निर्माण के कार्यों की सराहना की।